Tuesday, May 21, 2024
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    कौन थे महान संत रविदास,2024 में कब मनाई जाएगी रविदास जयंती!

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    “मन चंगा तो कठौती में गंगा” यह कहावत सभी ने तो सुना ही होगा इस कहावत को बनाने वाले गुरु रविदास जी की जयंती माघ महीने में पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। वे बहुत ही महान कवि थे इसलिए उनके याद में प्रत्येक वर्ष उनकी जयंती मनाई जाती है। इस साल 2024 में संत रविदास जयंती 24 फरवरी शनिवार दिन को मनाई जाएगी।

    संत रविदास भारतीय कवि , दर्शन शास्त्री , समाज सुधारक , एवं महान संत थे उनके दोहे आज भी लोगों के बीच प्रसिद्ध है। यह संत कबीर दास के समकालीन थे वे संत कबीर दास के अच्छे मित्र एवं शिष्य के रूप में पहचाने जाते हैं। संत रविदास जी ने रविदासिया पंथ की स्थापना की थी। इन्होंने जात-पात का विरोध किया और आत्मज्ञान का मार्ग दिखाया उनके कहे हुए मार्ग पर आज भी लोग चलते हैं।

    क्यों मनाई जाती है रविदास जयंती?

    गुरु रविदास जी का जन्म माघ मास की पूर्णिमा को रविवार के दिन 1433 ई को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ था। प्रत्येक वर्ष माघ माह के पूर्णिमा के दिन गुरु रविदास जी की जयंती मनाई जाती है।

    संत रविदास जी की जन्म को लेकर विवाद है लेकिन उनके एक दोहे के अनुसार उनका जन्म माघ मास के पूर्णिमा को 1433 ई में हुआ था। दोहा इस प्रकार है “चौदह सौ तैंतीस कि माघ सुदी पंद्रास दुखियों के कल्याण हित प्रगटे श्री गुरू रविदास” इससे स्पष्ट होता है कि संत रविदास जी का जन्म 1433 ईस्वी में ही हुआ था। गुरु रविदास जी ने भक्ति आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी उन्होंने जातिवाद का विरोध किया एवं आत्मज्ञान का मार्ग दिखाया जिस वजह से वह सब के प्रिय हो गए, इसलिए प्रत्येक वर्ष रविदास जयंती मनाई जाती है।

    संत रविदास जी की प्रचलित कथा!

    संत रविदास जी की एक कथा बहुत ही प्रचलित है। कहा जाता है कि एक बार उनके समकालीन राजा की पत्नी का कंगन खो गया था जिसे ढूंढने के लिए राजा ने ब्राह्मण को आदेश दिया और साथ ही साथ यह भी कहा कि अगर इसकी जोड़े कंगन ब्राह्मण उसे लाकर नहीं देंगे तो उन्हें जान से मार दिया जाएगा। राजा की यह वचन सुनकर ब्राह्मण चिंतित हो गए। वे इस समस्या की समाधान लेने गुरु रविदास जी के पास जा पहुंचे और उन्होंने अपनी सारी समस्याएं उनसे कह डाला इसके बाद गुरु रविदास जी ने अपने पास रखें कठौती से गंगा मां को आवाहन कर उनसे कंगन का जोड़ा मांगा उसके बाद गंगा मां प्रकट होकर संत रविदास को उस कंगन का जोड़ा दे दिया। उसी समय उन्होंने कहा था मन चंगा तो कठौती में गंगा।

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